ऐसे कई मौके आते हैं जब आपको अपने कंप्यूटर की स्क्रीन छोटी महसूस होती
है, खासकर कोई फिल्म या गाना देखते समय या फिर कोई धुआंधार कंप्यूटर गेम
खेलते समय।अगर किसी तरह अपने कंप्यूटर या लैपटॉप को ड्राइंगरूम या बेडरूम
में लगे 40 इंच के टेलीविजन सेट से जोड़ लिया जाए तो शायद यह संभव हो जाए।
मगर इसके लिए तो बड़ी तकनीकी जानकारी की जरूरत होगी! क्या आप-हम जैसे आम
इंसान के लिए ऐसा करना संभव है?
जी हां, थोड़ी-सी कोशिश से यह संभव हो सकता है। अगर आपने कभी अपने टेलीविजन सेट के पीछे और साइड में देखा हो तो वहां कई तरह के पोर्ट (होल, सॉकेट्स आदि) दिखाई देते हैं जो ऑडियो-विडियो सिग्नल रिसीव करने (इनपुट) और सिग्नल बाहर भेजने (आउटपुट) के लिए इस्तेमाल होते हैं। इन्हीं की मदद से टेलीविजन सीडी-डीवीडी प्लेयर या सेट टॉप बॉक्स से सिग्नल रिसीव करके आपको स्क्रीन पर दिखाता है। इन्हीं के जरिए वह होम थिएयर सिस्टम को आउटपुट भेजता है,
जिससे आप बेहतर क्वॉलिटी के स्पीकर पर साउंड सुन पाते हैं। इन्हीं पोर्ट्स का इस्तेमाल आपके टेलीविजन को कंप्यूटर, लैपटॉप या टैब्लेट से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है।
जी हां, थोड़ी-सी कोशिश से यह संभव हो सकता है। अगर आपने कभी अपने टेलीविजन सेट के पीछे और साइड में देखा हो तो वहां कई तरह के पोर्ट (होल, सॉकेट्स आदि) दिखाई देते हैं जो ऑडियो-विडियो सिग्नल रिसीव करने (इनपुट) और सिग्नल बाहर भेजने (आउटपुट) के लिए इस्तेमाल होते हैं। इन्हीं की मदद से टेलीविजन सीडी-डीवीडी प्लेयर या सेट टॉप बॉक्स से सिग्नल रिसीव करके आपको स्क्रीन पर दिखाता है। इन्हीं के जरिए वह होम थिएयर सिस्टम को आउटपुट भेजता है,
जिससे आप बेहतर क्वॉलिटी के स्पीकर पर साउंड सुन पाते हैं। इन्हीं पोर्ट्स का इस्तेमाल आपके टेलीविजन को कंप्यूटर, लैपटॉप या टैब्लेट से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है।
Step 1. कंप्यूटर और टेलीविजन को आपस में जोड़ना
Composite
विडियो केबल का इस्तेमालः कंप्यूटर और टीवी को स्विच ऑन किए बिना पहले
केबल के जरिए आपस में कनेक्ट करना होगा। ज्यादातर पुराने टेलीविजन सेट्स
में तीन महीन होल वाली Composite केबल की व्यवस्था होती है। अपने टीवी सेट
के पीछे या साइड में देखिए। वहां लाल, काले और पीले रंग के तीन होल दिखाई
देंगे। यही Composite केबल पोर्ट्स हैं जिनमें लगने वाली केबल में भी दोनों
तरफ इन्हीं तीन रंगों वाले तीन कनेक्टर होते हैं। आम कंप्यूटरों और लैपटॉप
के ग्राफिक्स कार्ड्स में भी ऐसे ही तीन पोर्ट मौजूद होते हैं। इसी तरह के
पोर्ट आपने अपने सीडी-डीवीडी प्लेयर में भी देखे होंगे। अगर आपके टीवी और
कंप्यूटर दोनों में Composite केबल के लिए होल मौजूद हैं तो उन्हें इस केबल
के जरिए आपस में जोड़ लें। ध्यान रखें कि टीवी और कंप्यूटर दोनों में ही
कनेक्ट होने वाले होल का रंग कनेक्टर (केबल का पिन वाला हिस्सा) के रंग से
मिलना चाहिए। इस तीन-मुंहा केबल में पीली पिन विडियो सिग्नल के लिए
इस्तेमाल होती है, जबकि बाकी दो पिन ऑडियो सिग्नल के लिए।
S-Video
केबल के जरिए कनेक्शन : S-Video पोर्ट आपको ज्यादातर लैपटॉप और डेस्कटॉप
कंप्यूटरों में दिखाई देगा। गोल आकार के इस छोटे से पोर्ट के जरिए कंप्यूटर
से विजुअल सिग्नल टेलीविजन या किसी भी दूसरी स्क्रीन को भेजे जा सकते हैं,
बशर्ते उसमें इसका कनेक्टिंग सॉकेट मौजूद हो। हालांकि S-Video पोर्ट में
ऑडियो सिग्नल भेजने की व्यवस्था नहीं है और टेलीविजन पर ऑडियो सुनने के लिए
आपको अलग से ऑडियो केबल का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसके लिए दो छेद वाले
हेडफोन जैक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें से एक छेद माइक्रोफोन केबल
के लिए और दूसरा हेडफोन केबल के लिए होता है।
सबसे
पहले अपने लैपटॉप-कंप्यूटर के S-Video पोर्ट में कनेक्टिंग केबल का एक
सिरा डालें और दूसरा सिरा टेलीविजन के S-Video पोर्ट से कनेक्ट करें। अब
हेडफोन जैक में मौजूद हेडफोन केबल वाले पोर्ट में दूसरा कनेक्टिंग केबल
लगाएं और दूसरे छोर पर इसे टेलीविजन के ऑडियो पोर्ट से जोड़ें। ध्यान रखें
कि कहीं आप गलती से कंप्यूटर के माइक्रोफोन वाले पोर्ट से तो केबल नहीं
कनेक्ट कर रहे हैं। दोनों पोर्ट के पास हेडफोन और माइक्रोफोन के चित्र बने
होते हैं इसलिए उन्हें पहचानना मुश्किल नहीं है। अगर आपके पास S-Video और
ऑडियो केबल नहीं हैं तो बाजार से अपनी जरूरत के मुताबिक लंबी केबल खरीदनी
होगी।
VGA
केबल के जरिए कनेक्शनः करीब-करीब सभी डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटरों में
VGA पोर्ट मौजूद होता है। यह एक आयताकार पोर्ट है, जिसमें तीन कतारों में
पांच-पांच पिनों वाले महीन छेद बने होते हैं। आपके मॉनिटर से जो नीली केबल
कंप्यूटर के CPU से जुड़ती है, वह इसी पोर्ट से कनेक्ट की जाती है। अगर
आपके टेलीविजन में भी इसी तरह का पोर्ट मौजूद है तो आपको बस यह करना है कि
एक VGA केबल के जरिए कंप्यूटर और टेलीविजन के VGA पोर्ट को आपस में जोड़
दें। इसके लिए आपको VGA केबल खरीदनी पड़ सकती है।
S-Video
की ही तरह VGA पोर्ट में भी सिर्फ विजुअल सिग्नल भेजने की क्षमता है। वह
ऑडियो सिग्नल नहीं भेज सकता। ऐसे में आपको टेलीविजन पर ऑडियो सुनने के लिए
उसी तरह हेडफोन केबल का इस्तेमाल करना होगा जैसे ऊपर S-Video पोर्ट के
मामले में बताया गया है। अगर टेलीविजन में VGA पोर्ट मौजूद नहीं है तो
बाजार से कनवर्टर बॉक्स लिया जा सकता है जो VGA सिग्नल को S-Video सिग्नल
में बदल देता है।
HDMI
केबल के जरिए कनेक्शनः फ्लैश ड्राइव से कुछ चौड़े दिखने वाले प्लग से लैस
यह नई किस्म की केबल बेस्ट क्वॉलिटी के हाई डेफीनिशन विडियो सिग्नल भेजने
में सक्षम है। अगर आपके टीवी और कंप्यूटर में ज्यादातर किस्म के केबल पोर्ट
मौजूद हैं तो उन्हें कनेक्ट करने के लिए HDMI केबल ही चुनें, जिसे कनेक्ट
करना सबसे आसान और नतीजा सबसे अच्छा होता है।
ज्यादातर
नए एलईडी और एलसीडी टेलीविजन सेट्स में HDMI केबल के लिए पोर्ट मौजूद होता
है और आधुनिक लैपटॉप में भी। कुछ डेस्कटॉप कंप्यूटरों के ग्राफिक्स कार्ड
में भी HDMI पोर्ट होता है, हालांकि उनमें यह बहुत आम नहीं है। अगर आपके
टेलीविजन और कंप्यूटर दोनों में HDMI पोर्ट मौजूद हैं तो उन्हें आपस में
जोड़ना बहुत आसान है। आपको बस जरूरत है तो एक HDMI केबल की, जो डिजिटल
सिग्नल भेजने के लिए बेहतरीन जरिया मानी जाती है। इसमें एक ही केबल के जरिए
विडियो और ऑडियो दोनों तरह के सिग्नल भेजे जा सकते हैं।
अगर
आपके टेलीविजन में HDMI पोर्ट नहीं है तो संभव है कि उसमें DVI-D पोर्ट
मौजूद हो। ऐसे में आपको HDMI से DVI-D कनवर्टर केबल की जरूरत पड़ेगी। अगर
आपने कंप्यूटर और टेलीविजन को सही केबल के जरिए सही ढंग से जोड़ लिया है तो
समझिए कि बड़े झंझट वाला काम पूरा हो गया। अब कम झंझट वाला एक काम और बचा
है, जिसके तहत आपको टेलीविजन और कंप्यूटर/लैपटॉप में इनपुट-आउटपुट संबंधी
सेटिंग्स करनी है। यह बहुत आसान है और दो-तीन बार ऐसा करने के बाद आपको इस
प्रोसेस में मुश्किल से दो-तीन मिनट लगेंगे।
अब
आपको अपने टेलीविजन में Video Mode संबंधी जरूरी सेटिंग करनी है ताकि वह
कंप्यूटर से आने वाले सिग्नल को रिसीव कर सके। कंप्यूटर और टेलीविजन को आपस
में कनेक्ट करने के बाद दोनों को ऑन कीजिए। अब टेलीविजन का रिमोट कंट्रोल
हाथ में लेकर वह बटन ढूंढिए जो टीवी में रिसीव होने वाले सिग्नल चुनने के
लिए इस्तेमाल होता है। आम तौर पर इस बटन पर मॉनिटर का निशान बना होता है और
Source लिखा होता है। यह वही बटन है जिसे दबाकर आप केबल टीवी या सेट टॉप
बॉक्स से सिग्नल रिसीव करने के लिए सेटिंग करते हैं।
बटन
को दो-तीन बार दबाकर देखिए। टेलीविजन की स्क्रीन पर अलग-अलग ऑप्शन दिखाई
देंगे। मसलन PC, HDMI, DVI, Mono, Videov, Videow वगैरह। यहां आपको PC
विकल्प का चुनाव करना है।
Step 3. कंप्यूटर/लैपटॉप में जरूरी सेटिंग-
ज्यादातर
डेस्कटॉप कंप्यूटरों में इससे ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती।
बहरहाल, ज्यादातर लैपटॉप्स में एक फंक्शन की (Fn) के साथ F5 बटन दबाकर
विडियो आउटपुट सोर्स संबंधी सेटिंग्स बदली जा सकती हैं। कुछ लैपटॉप्स में
F5 बटन की जगह कोई दूसरा खास बटन (F3, F4, F8, F9 वगैरह) इस काम के लिए हो
सकता है, जिसकी जानकारी लैपटॉप के मैनुअल में मिलेगी। Fn बटन के साथ इस खास
बटन को बार-बार दबाने पर डिस्प्ले के अलग-अलग ऑप्शन दिखाई देंगे, जैसे-
सिर्फ लैपटॉप पर डिस्प्ले, सिर्फ टेलीविजन पर डिस्प्ले और ड्युअल डिस्प्ले।
ये ऑप्शन आपको यह चुनने का मौका देते हैं कि विजुअल्स सिर्फ टेलीविजन की
स्क्रीन पर ही दिखाई दें या टेलीविजन के साथ-साथ लैपटॉप की स्क्रीन पर भी
(ड्युअल डिस्प्ले)। ये ऑप्शन आपको यह चुनने का मौका देते हैं कि विजुअल्स
सिर्फ टेलिविजन की स्क्रीन पर ही दिखाई दें या टेलीविजन के साथ-साथ लैपटॉप
की स्क्रीन पर भी (ड्युअल डिस्पले)।
क्यों पड़ती है टीवी को मॉनिटर बनाने की जरूरतः
1.
आराम से बिस्तर पर बैठकर काम करने के लिए। अगर वायरलैस कीबोर्ड और माउस
मौजूद हो तो कंप्यूटर अपनी जगह पड़ा रहेगा और आप बैठे होंगे अपने बिस्तर पर
सिर्फ कीबोर्ड और माउस लेकर। ज्यादा सर्दी या ज्यादा गर्मी के दिनों में
बहुत सुविधाजनक।
2. यू-ट्यूब जैसी साइटों के विडियो और गाने वगैरह देखने के लिए।
3. इंटरनेट साइट्स पर स्ट्रीमिंग के जरिए दिखाई जाने वाली फिल्मों का मजा बड़ी स्क्रीन पर लेने के लिए, जो डाउनलोड नहीं होतीं।
4. कंप्यूटर गेम्स और फ्लैश ऐनीमेशन का मजा लेने के लिए।
5.
स्काइप, गूगल विडियो चैट या दूसरे विडियो चैट एप्लीकेशंस का इस्तेमाल करते
समय, ताकि बड़े आकार के विडियो के जरिए, आमने-सामने बातचीत की फीलिंग आ
सके।
6. कमजोर नज़र वाले लोगों के लिए लैपटॉप और डेस्कटॉप पर काम करना आसान बनाने के लिए।
7. कोई प्रेजेन्टेशन देते समय प्रोजेक्टर के विकल्प के रूप में। किसी विडियो फिल्म, विज्ञापन वगैरह को दिखाते समय।
8.
किसी खास फॉरमैट में बनी विडियो-ऑडियो फाइलों को देखने के लिए जो
सीडी-डीवीडी प्लेयर पर नहीं चलतीं, सिर्फ कंप्यूटर में इनस्टाल किए गए किसी
खास सॉफ्टवेयर में ही चल सकती हैं, जैसे मेडिकल मामलों में।
9.
बड़े मॉल्स, स्टेशनों, दफ्तरों वगैरह में खास किस्म की सूचनाएं, विजुअल्स,
पब्लिसिटी मटीरियल, नक्शे, डायरेक्शंस आदि दिखाने के लिए। बड़े आकार के
डिजिटल फोटो फ्रेम के रूप में।
10. बड़ी स्क्रीन पर ई-बुक्स पढ़ने के लिए।
11.
उन लोगों के लिए जो आंखों की सेहत को लेकर सतर्क हैं और स्क्रीन पर च्यादा
देर तक काम करते समय आंखों पर प्रेशर नहीं डालना चाहते।


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